नेपाल और नेपाल
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आर्यावर्त , भारत , हिन्द , हिन्दुस्तान या इंडिया कुछ भी नाम लें परन्तु इस भूभाग से अधिक नेपाल में भारतीय संस्कृति और संस्कृत का अधिक विकास हुआ जब तक नेपाल चीन और पाकिस्तान की हस्तक्षेप की जद में न आ गया ।
नेपाल में ऐसा होने के कारण हैं जिनमें सबसे बड़ा आर्थिक है । चीन, पाकिस्तान ने जहाँ स्पष्ट रूप से नेपाल को मदद पहुँचाई वहीं यहाँ के युवकों और सत्ता विरोधी तत्वों सेन केन प्रकारेण लाभ पहुँचाना भी उद्देश्य रहा ।भारत ने गंभीरता से नहीं लिया ।
एक मात्र हिन्दू राष्ट्र की उपेक्षा भारतीय मानसिकता रही है ।हम हर चीज़ को स्वत: मान लेते रहे अपने पक्ष में ।हमने उनकी सज्जनता , सीधेपन पर तब तक चुटकुले बनाना बन्द नहीं किये जब तक वे हमसे स्थाई रूप से नाराज़ नहीं हो गये । नेपाल की विशेषता को भारत उसकी कमज़ोरी मानता रहा, यही हमारी और हमारी विदेश नीति की असफलता है ।
नेपाल का साम्यवादियो के हाथों जाना पुनःभारत विरोधी घटनाक्रम हुआ ,परन्तु हम नहीं चेतें ।तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने नेपाल पर ध्यान देना अधिक उचित नहीं समझा । आज चीन का प्रभाव वहाँ सर्वाधिक है जिसे भारत की नई सरकार को संतुलित करना होगा । ।भूटान के बाद मोदी जी को अपनी प्राथमिकता वाला राष्ट्र नेपाल को बनान होगा ।
राज कुमार सचान होरी
वरिष्ठ साहित्यकार , राष्ट्रीय अध्यक्ष ---बदलता भारत
सम्पादक -- पटेल टाइम्स
Horibadaltabharat.blogspot.com ,PatelTimes .blogspot.com
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Thursday, June 19, 2014
Sunday, June 15, 2014
राजनीति में नीति किधर? मैं ढूँढ रहा हूं युग युग मे
राजनीति में नीति किधर? मैं ढूँढ रहा हूं युग युग में ।
सतयुग ढूँढा, ढूंढा त्रेता ,ढूँढा द्वापर कलियुग में ।।
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हरिश्चंद्र का राजपाट भी , राजनीति ने छीना था ,
और मंथरा राजनीति ने , राम राज क्या कीन्हा था ?
बालि और रावण वध में भी नीति ,अनीति कहाँ तक थीं?
अग्निपरीक्षित हो कर भी क्या , सीता को विष पीना था ??
क्या सतयुग ,क्या त्रेता में भी राजनीति थी पग पग में ?
राजनीति में नीति किधर ? मैं ढूँढ रहा हूँ युग युग में ।।
००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
द्वापर का तो अंश अंश भी राजनीति में पगा हुआ ।
कथा महाभारत में बोलो भ्रात भ्रात क्या सगा हुआ ?
विदुर नीति या नीति युधिष्ठिर क्या केवल आदर्श न थी,
क्या आदर्श? नहीं दिखता है , राजनीति से ठगा हुआ ?
कृष्ण काल में राजनीति ही व्याप्त हुई थी नग नग में
राजनीति में नीति किधर ? मैं ढूँढ रहा हूँ युग युग में ।
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राज कुमार सचान होरी
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सतयुग ढूँढा, ढूंढा त्रेता ,ढूँढा द्वापर कलियुग में ।।
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हरिश्चंद्र का राजपाट भी , राजनीति ने छीना था ,
और मंथरा राजनीति ने , राम राज क्या कीन्हा था ?
बालि और रावण वध में भी नीति ,अनीति कहाँ तक थीं?
अग्निपरीक्षित हो कर भी क्या , सीता को विष पीना था ??
क्या सतयुग ,क्या त्रेता में भी राजनीति थी पग पग में ?
राजनीति में नीति किधर ? मैं ढूँढ रहा हूँ युग युग में ।।
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द्वापर का तो अंश अंश भी राजनीति में पगा हुआ ।
कथा महाभारत में बोलो भ्रात भ्रात क्या सगा हुआ ?
विदुर नीति या नीति युधिष्ठिर क्या केवल आदर्श न थी,
क्या आदर्श? नहीं दिखता है , राजनीति से ठगा हुआ ?
कृष्ण काल में राजनीति ही व्याप्त हुई थी नग नग में
राजनीति में नीति किधर ? मैं ढूँढ रहा हूँ युग युग में ।
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राज कुमार सचान होरी
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Sunday, April 13, 2014
Saturday, April 5, 2014
Friday, April 4, 2014
Thursday, April 3, 2014
Friday, March 28, 2014
Wednesday, March 19, 2014
Tuesday, March 18, 2014
Monday, March 17, 2014
चुनाव में किसान /एक भावी आन्दोलन
चुनाव में किसान /एक भावी आन्दोलन
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पूरे देश में चुनाव का माहौल है , देश की सरकार जो बननी है । सबसे ज्यादा मतदाता किसान हैं लगभग 70% परन्तु हर बार उनका वोट तो लिया जाता है पर उनकी फसलों का वाजिब मूल्य नहीं दिया जाता । लागत मूल्य फसलों का बढ़ते रहने से किसान को आमदनी न के बराबर होती है , खर्च चलाना दूभर । किसान पूरे देश में आत्म हत्या करते हैं जो मात्र एक ख़बर भी नहीं बन पाती है । मैं स्वयं किसान हूँ और उत्तर प्रदेश प्रशासन में 34 वर्षों की सेवा भी की है साथ ही पूरे देश में किसानों के मध्य गया हूँ , अच्छी तरह जानता हूँ कि किसानों को गेहूं, धान आदि पारम्परिक खेती बन्द करनी पड़ेगी अपने स्वयं और परिवार को बचाने के लिये । वानिकी , औद्यानिक और मछली पालन जैसे क्षेत्रों में जाना होगा भले ही देश में खाद्यान का उत्पादन अत्यन्त कम हो जाय । अगली सरकार क्या फसलों के मूल्य वास्तविक लागत से अधिक निश्चित करेगी ??? अभी से किसानों और किसान संगठनों को विभिन्न दलों से आश्वासन लेना होगा ।
मैं लगातार किसानों से अपील करता रहा हूँ कि वे अपनी कृषि भूमि का कम से कम 20% बेच कर अपने गाँव के पास के कस्बे में उससे एक प्लाट ले लें जो कुछ ही वर्षों में उसको बहुत बड़ी कीमत देगा जो उसकी कुल भूमि की कीमत से भी अधिक होगी । गाँव में रहने के बजाय पास के कस्बे में रह कर अपनी खेती भी देखे और बच्चों को शहर में पढ़ाये , लिखाये । शहर में उसे खेती के अलावा भी कोई धन्धा अवश्य मिल जायेगा जो उसकी ग़रीबी और भुखमरी दूर करेगा ।
इसके लिये यथाशीघ्र मेरे द्वारा एक राष्ट्र व्यापी आन्दोलन आरम्भ किया जायेगा , जिसकी कार्य योजना तैयार की जा रही है ।आप स्वयं किसान हैं या किसान परिवार से हैं तो आपका सक्रिय सहयोग चाहिये ।
आपका साथी---
राज कुमार सचान "होरी"
www.badaltabharat.com , horibadaltabharat.blogspot.com ,
Facebook.com/RajKumarSachanHori
horirajkumarsachan@gmail.com
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पूरे देश में चुनाव का माहौल है , देश की सरकार जो बननी है । सबसे ज्यादा मतदाता किसान हैं लगभग 70% परन्तु हर बार उनका वोट तो लिया जाता है पर उनकी फसलों का वाजिब मूल्य नहीं दिया जाता । लागत मूल्य फसलों का बढ़ते रहने से किसान को आमदनी न के बराबर होती है , खर्च चलाना दूभर । किसान पूरे देश में आत्म हत्या करते हैं जो मात्र एक ख़बर भी नहीं बन पाती है । मैं स्वयं किसान हूँ और उत्तर प्रदेश प्रशासन में 34 वर्षों की सेवा भी की है साथ ही पूरे देश में किसानों के मध्य गया हूँ , अच्छी तरह जानता हूँ कि किसानों को गेहूं, धान आदि पारम्परिक खेती बन्द करनी पड़ेगी अपने स्वयं और परिवार को बचाने के लिये । वानिकी , औद्यानिक और मछली पालन जैसे क्षेत्रों में जाना होगा भले ही देश में खाद्यान का उत्पादन अत्यन्त कम हो जाय । अगली सरकार क्या फसलों के मूल्य वास्तविक लागत से अधिक निश्चित करेगी ??? अभी से किसानों और किसान संगठनों को विभिन्न दलों से आश्वासन लेना होगा ।
मैं लगातार किसानों से अपील करता रहा हूँ कि वे अपनी कृषि भूमि का कम से कम 20% बेच कर अपने गाँव के पास के कस्बे में उससे एक प्लाट ले लें जो कुछ ही वर्षों में उसको बहुत बड़ी कीमत देगा जो उसकी कुल भूमि की कीमत से भी अधिक होगी । गाँव में रहने के बजाय पास के कस्बे में रह कर अपनी खेती भी देखे और बच्चों को शहर में पढ़ाये , लिखाये । शहर में उसे खेती के अलावा भी कोई धन्धा अवश्य मिल जायेगा जो उसकी ग़रीबी और भुखमरी दूर करेगा ।
इसके लिये यथाशीघ्र मेरे द्वारा एक राष्ट्र व्यापी आन्दोलन आरम्भ किया जायेगा , जिसकी कार्य योजना तैयार की जा रही है ।आप स्वयं किसान हैं या किसान परिवार से हैं तो आपका सक्रिय सहयोग चाहिये ।
आपका साथी---
राज कुमार सचान "होरी"
www.badaltabharat.com , horibadaltabharat.blogspot.com ,
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Saturday, March 15, 2014
कुंडलियां
कुंडलियां
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१--उधर विदेशी हाथ है , इधर देश का हाथ ।
आम आदमी पार्टी , लिये दोउ का हाथ ।।
लिये दोउ का साथ , फिर रहा कजरू लाला ।
झूठ , झूठ फिर झूठ , बोलता मुफलर वाला ।।
घोर अराजक , पलटू , झूठा महा जुगाड़ू़ ।
कजरू लेकर फिरे हाथ में गंदा झाड़ू ।।
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२-- बात ,बात में बोले जो औरों को काला ।
थूक थूक कर चाटे फिर , वह कजरू लाला ।।
आम आदमी नाम रख लिया , अपने दल का ।
सदा सहारा लेते , कजरू पल पल छल का ।।
चोर चोर सब चोर आप चिल्लाते रहते ।
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१--उधर विदेशी हाथ है , इधर देश का हाथ ।
आम आदमी पार्टी , लिये दोउ का हाथ ।।
लिये दोउ का साथ , फिर रहा कजरू लाला ।
झूठ , झूठ फिर झूठ , बोलता मुफलर वाला ।।
घोर अराजक , पलटू , झूठा महा जुगाड़ू़ ।
कजरू लेकर फिरे हाथ में गंदा झाड़ू ।।
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२-- बात ,बात में बोले जो औरों को काला ।
थूक थूक कर चाटे फिर , वह कजरू लाला ।।
आम आदमी नाम रख लिया , अपने दल का ।
सदा सहारा लेते , कजरू पल पल छल का ।।
चोर चोर सब चोर आप चिल्लाते रहते ।
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Thursday, February 27, 2014
Sunday, February 16, 2014
DOHE MODI KE
दोहे मोदी के
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1--मोदी जैसा चाहिये , कुशल प्रशासक आज ।
जो पटेल सा बन करे , राष्ट्र जनों का काज ।।
2--लौह शक्ति सा हो अटल ,हो पटेल का दूत ।
मोदी भारत भूमि का , सच्चा , सुदृढ़ सपूत ।।
3--आज राष्ट्र को चाहिये , एक कुशल सरदार ।
जो सरदार पटेल का , निभा सके किरदार ।।
4--मोदी और पटेल की , बी जे पी की राह ।
कुशल प्रशासक चाहिये, आज देश की चाह ।।
5--सशक्त राष्ट्र के वास्ते , लौह पुरुष की राह ।
मोदी जी अब सज रहे , अजी वाह भइ वाह ।।
राज कुमार सचान "होरी"
9958788699 , 07599155999
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